आजादी

by - August 15, 2026






कलम और तलवार से लिखी गई थी भारत की आजादी 
वीरों के तलवार टकराये, लहू से सिंची थी धरती प्यारी
वीर कवि ने आजादी की परिकल्पना से परे
आज का हिंदुस्तान ढूंढ रहा आजादी के मायने

आजादी एक शब्द नहीं है 
यह सोच है, सपनों को उड़ान देने की
बिना डरे मन की अभिव्यक्ति,
 सत्कर्म पर चलने की प्रगति है 

आजादी के 80 वर्ष की सालगिरह मान रहा हिंदुस्तान 
पर डरा डरा सहमा यहां हर इंसान है 
विद्यालय बंद हुए टैक्स की भरमार है 
दिखते नहीं आजादी के सुनहरे दिन 
जनता, भ्रष्ट नेताओं से परेशान है 

भगवान बुद्ध और नानक की गुरुवाणी को सच्चे इंसान की तलाश है 
चल सके जो सदमार्ग पर, अपनी जिम्मेवारी को निभाने वाले देश का संचालक की तलाश है 

आजादी की जिम्मेवारी कौन संभालेगा 
बेरोजगारी, गरीबी, भ्रष्टाचार की बढ़ती बेल 
भारत मां का कौन सपूत कटेगा 

किसे है आजादी, कानून बनाने वाले को 
या कानून के दायरे में रहने वालों को 
विषय सोचनीय है, आजादी अभी बहुत दूर है 
बहुत दूर है




You May Also Like

2 comments